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Atharvaveda / 17 / 1 / 22

उ॑द्य॒ते नम॑उदाय॒ते नम॒ उदि॑ताय॒ नमः॑। वि॒राजे॒ नमः॑ स्व॒राजे॒ नमः॑ स॒म्राजे॒ नमः॑॥22॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 17 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 22

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : आदित्य | छन्द : द्विपदा अनुष्टुप् | स्वर :

विषय : आयु की बढ़ती के लिये उपदेश।

पदपाठ : उ॒त्ऽय॒ते । नम॑: । उ॒त्ऽआ॒य॒ते । नम॑: । उत्ऽइ॑ताय । नम॑: । वि॒ऽराजे॑ । नम॑: । स्व॒ऽराजे॑ । नम॑: । स॒म्ऽराजे॑ । नम॑: ॥१.२२॥

पदार्थ : (उद्यते) उदय होतेहुए [परमेश्वर] को (नमः) नमस्कार है, (उदायते) ऊँचे आते हुए को (नमः) नमस्कारहै, (उदिताय) उदय हो चुके हुए को (नमः) नमस्कार है। (विराजे) विविध राजा को (नमः) नमस्कार है, (स्वराजे) अपने आप राजा को (नमः) नमस्कार है, (सम्राजे)सम्राट् [राजराजेश्वर] को (नमः) नमस्कार है ॥२२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२२−(उद्यते)प्रलयसृष्टिसन्धिदशायामुदयं गच्छते परमेश्वराय (नमः) नमस्कारः (उदायते)उत्+आङ्+इण् गतौ-शतृ। सृष्टिकाल उदयमागच्छते (उदिताय) सृष्टिसमाप्तिकाल उदयंप्राप्ताय (विराजे) विविधेश्वराय (स्वराजे) स्वयमैश्वर्यवते (सम्राजे)राजराजेश्वराय। अन्यद् गतम् ॥