Atharvaveda / 19 / 23 / 14
स॑प्तदश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 14॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 14
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : pa~NktiH | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : saptadasharchebhyaH svaahaa . 14.
Component Words : saptadasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.14.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : स॒प्त॒द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.१४॥
पदार्थ : (सप्तदशर्चेभ्यः) सत्तरह [चार दिशा, चार विदिशा, एक ऊपर की और एक नीचे की दस दिशायें−सत्त्व रज, और तम तीन गुण, ईश्वर, जीव, प्रकृति और संसार] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१४−(सप्तदशर्चेभ्यः) म०१। चतस्रो दिशाश्चतस्रो मध्यदिशा एकोपरिस्था, एकाधोभवेति दश दिशाः, सत्त्वरजस्तमांसि त्रयो गुणाः, ईश्वरो जीवः प्रकृतिः संसारश्चेति सप्तदशानां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥