Atharvaveda / 19 / 23 / 15
अ॑ष्टादश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 15॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 15
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : aShTaadasharchebhyaH svaahaa . 15.
Component Words : aShTaadasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.15.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : अ॒ष्टा॒द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.१५॥
पदार्थ : (अष्टादशर्चेभ्यः) अठारह [धैर्य, सहन, मन का रोकना, चोरी न करना, शुद्धता, जितेन्द्रियता, बुद्धि, विद्या, सत्य, क्रोध न करना, ये दस धर्म-मनु०६।९२, तथा ब्राह्मण, गौ, अग्नि, सुवर्ण, घृत, सूर्य, जल, राजा ये आठ मङ्गल-शब्दकल्पद्रुमकोश, इन अठारह] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१५−(अष्टादशर्चेभ्यः) म०१। धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्-मनु०६।९२। लोकेऽस्मिन् मङ्गलान्यष्टौ ब्राह्मणो गौर्हुताशनः। हिरण्यं सर्पिरादित्य आपो राजा तथाऽष्टमः ॥१॥ इति शब्दकल्पद्रुमकोशः। एतेषामष्टादशानां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥