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Rigveda / 8 / 29 / 5

ति॒ग्ममेको॑ बिभर्ति॒ हस्त॒ आयु॑धं॒ शुचि॑रु॒ग्रो जला॑षभेषजः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 29 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : मनुर्वैवस्वतः कश्यपो वा मारीचः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : ति॒ग्मम् । एकः॑ । बि॒भ॒र्ति॒ । हस्ते॑ । आयु॑धम् । शुचिः॑ । उ॒ग्रः । जला॑षऽभेषजः ॥ ८.२९.५

पदार्थ :

भावार्थ :