Rigveda / 9 / 9 / 3
स सू॒नुर्मा॒तरा॒ शुचि॑र्जा॒तो जा॒ते अ॑रोचयत् । म॒हान्म॒ही ऋ॑ता॒वृधा॑ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 9 | Mantra No : 3
In English:
Seer : asitaH kaashyapo devalo vaa | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : sa suunurmaataraa shuchirjaato jaate arochayat . mahaanmahii RRItaavRRidhaa .
Component Words : saH . suunuH . maataraa . shuchiH . jaataH . jaate iti . arochayat . mahaan . mahii . RRIta.avRRidhaa . 9.9.3
In Hindi:
ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : सः । सू॒नुः । मा॒तरा॑ । शुचिः॑ । जा॒तः । जा॒ते इति॑ । अ॒रो॒च॒य॒त् । म॒हान् । म॒ही । ऋ॒त॒ऽवृधा॑ ॥ ९.९.३
पदार्थ : (सः) वह कर्मयोगी पुरुष (शुचिः) पवित्र है (महान्) विशालात्मावाला है (ऋता, वृधा) यज्ञ के बढ़ानेवाले (मही) महान् (जाते) विश्व के उत्पन्न करनेवाले (मातरा) जो माता पितारूप द्युलोक और पृथिवीलोक हैं, तिनका (जातः, सूनुः) वह सच्चा पुत्र है (अरोचयत्) और वह कर्मयोग से उनको ऐश्वर्यसम्पन्न करता है ॥३॥
भावार्थ : द्युलोक और पृथिवीलोक के मध्य में कर्मयोगी ही एक ऐसा पुरुष है, जो अपने कर्मों द्वारा संसार को प्रकाशित करता है। इसी अभिप्राय से उसको द्युलोक और पृथिवीलोक का सच्चा पुत्र कहा गया है ॥३॥
In Sanskrit:
ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : सः । सू॒नुः । मा॒तरा॑ । शुचिः॑ । जा॒तः । जा॒ते इति॑ । अ॒रो॒च॒य॒त् । म॒हान् । म॒ही । ऋ॒त॒ऽवृधा॑ ॥ ९.९.३
भावार्थ :