Rigveda / 9 / 61 / 9
स नो॒ भगा॑य वा॒यवे॑ पू॒ष्णे प॑वस्व॒ मधु॑मान् । चारु॑र्मि॒त्रे वरु॑णे च ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 61 | Mantra No : 9
In English:
Seer : amahiiyuH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : sa no bhagaaya vaayave puuShNe pavasva madhumaan . chaarurmitre varuNe cha .
Component Words : saH . naH . bhagaaya . vaayave . puuShNe . pavasva . madhu.amaan . chaaruH . mitre . varuNe . cha . 9.61.9
In Hindi:
ऋषि : अमहीयुः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : सः । नः॒ । भगा॑य । वा॒यवे॑ । पू॒ष्णे । प॒व॒स्व॒ । मधु॑ऽमान् । चारुः॑ । मि॒त्रे । वरु॑णे । च॒ ॥ ९.६१.९
पदार्थ : (मधुमान्) मधुर आनन्द के उत्पादक (चारुः) सर्वत्र गतिवाले (सः) वह आप (नः) मुझको (मित्रे) और उचित कर्म करनेवाले को तथा (वरुणे) जो सत्कार करने योग्य है, उसको (भगाय) ऐश्वर्य (वायवे) सुन्दर गति (पूष्णे) तथा पुष्टि प्राप्त होने के लिये (पवस्व) सोद्योग होवें ॥९॥
भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा से उद्योग की प्रार्थना की गई है। परमात्मा की परमकृपा से ही पुरुष उद्योगी बनकर परम ऐश्वर्य को प्राप्त होता है ॥९॥
In Sanskrit:
ऋषि : अमहीयुः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : सः । नः॒ । भगा॑य । वा॒यवे॑ । पू॒ष्णे । प॒व॒स्व॒ । मधु॑ऽमान् । चारुः॑ । मि॒त्रे । वरु॑णे । च॒ ॥ ९.६१.९
भावार्थ :