Rigveda / 9 / 86 / 39
गो॒वित्प॑वस्व वसु॒विद्धि॑रण्य॒विद्रे॑तो॒धा इ॑न्दो॒ भुव॑ने॒ष्वर्पि॑तः । त्वं सु॒वीरो॑ असि सोम विश्व॒वित्तं त्वा॒ विप्रा॒ उप॑ गि॒रेम आ॑सते ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 86 | Mantra No : 39
In English:
Seer : trayaRRiShigaNaaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : viraaDjagatii | Tone : niShaadaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : govitpavasva vasuviddhiraNyavidretodhaa indo bhuvaneShvarpitaH . tva.m suviiro asi soma vishvavitta.m tvaa vipraa upa girema aasate .
Component Words : go.avit . pavasva . vasu.avit . hiraNya.avit . retaH.adhaaH . indo iti . bhuvaneShu . arpitaH . tvam . su.aviiraH . asi . soma . vishva.avit . tam . tvaa . vipraaH . upa . giraa . ume . aasate . 9.86.39
In Hindi:
ऋषि : त्रयऋषिगणाः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्जगती | स्वर : निषादः
विषय :
पदपाठ : गो॒ऽवित् । प॒व॒स्व॒ । व॒सु॒ऽवित् । हि॒र॒ण्य॒ऽवित् । रे॒तः॒ऽधाः । इ॒न्दो॒ इति॑ । भुव॑नेषु । अर्पि॑तः । त्वम् । सु॒ऽवीरः॑ । अ॒सि॒ । सो॒म॒ । वि॒श्व॒ऽवित् । तम् । त्वा॒ । विप्राः॑ । उप॑ । गि॒रा । उ॒मे । आ॒स॒ते॒ ॥ ९.८६.३९
पदार्थ : (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (गोवित्) आप विज्ञानी हैं। ज्ञान से (पवस्व) हमको पवित्र करें। (वसुवित्) ऐश्वर्य्य से सम्पन्न हैं, ऐश्वर्य्य से हमको पवित्र करें। (हिरण्यवित्) प्रकाशस्वरूप हैं, प्रकाश से हमको पवित्र करें (रेतोधाः) आप प्रजा के बीजस्वरूप सामर्थ्य को धारण करनेवाले हैं (भुवनेषु अर्पितः) और सब संसार में व्याप्त हैं। (त्वं) तुम (सुवीरोऽसि) सर्वोपरि बलयुक्त हो (सोम) सर्वोत्पादक हो (विश्ववित्) सर्वज्ञाता हो (तं त्वां) उक्तगुणयुक्त आपको (विप्राः) विद्वान् लोग (उप गिरा इमे) उपासना करते हुए (आसते) स्थित होते हैं ॥३९॥
भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा को ज्ञान, प्रकाश और क्रिया इत्यादि अनन्त गुणों के आधाररूप से वर्णन किया है। इसी आशय को लेकर (स्वाभाविकी ज्ञान बल क्रिया) इत्यादि उपनिषद्वाक्यों में परमात्मा को ज्ञानबलक्रिया का आधार वर्णन किया है ॥३९॥
In Sanskrit:
ऋषि : त्रयऋषिगणाः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्जगती | स्वर : निषादः
पदपाठ : गो॒ऽवित् । प॒व॒स्व॒ । व॒सु॒ऽवित् । हि॒र॒ण्य॒ऽवित् । रे॒तः॒ऽधाः । इ॒न्दो॒ इति॑ । भुव॑नेषु । अर्पि॑तः । त्वम् । सु॒ऽवीरः॑ । अ॒सि॒ । सो॒म॒ । वि॒श्व॒ऽवित् । तम् । त्वा॒ । विप्राः॑ । उप॑ । गि॒रा । उ॒मे । आ॒स॒ते॒ ॥ ९.८६.३९
भावार्थ :