Rigveda / 9 / 91 / 3
वृषा॒ वृष्णे॒ रोरु॑वदं॒शुर॑स्मै॒ पव॑मानो॒ रुश॑दीर्ते॒ पयो॒ गोः । स॒हस्र॒मृक्वा॑ प॒थिभि॑र्वचो॒विद॑ध्व॒स्मभि॒: सूरो॒ अण्वं॒ वि या॑ति ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 91 | Mantra No : 3
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : triShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : vRRiShaa vRRiShNe roruvada.mshurasmai pavamaano rushadiirte payo goH . sahasramRRikvaa pathibhirvachovidadhvasmabhiH suuro aNva.m vi yaati .
Component Words : vRRiShaa . vRRiShNe . roruvat . a.mshuH . asmai . pavamaanaH . rushat . iirte . payaH . goH . sahasram . RRIkvaa . pathi.abhiH . vachaH.avit . adhvasma.abhiH . suuraH . aNvam . vi . yaati . 9.91.3
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : वृषा॑ । वृष्णे॑ । रोरु॑वत् । अं॒शुः । अ॒स्मै॒ । पव॑मानः । रुश॑त् । ई॒र्ते॒ । पयः॑ । गोः । स॒हस्र॑म् । ऋक्वा॑ । प॒थिऽभिः॑ । व॒चः॒ऽवित् । अ॒ध्व॒स्मऽभिः॑ । सूरः॑ । अण्व॑म् । वि । या॒ति॒ ॥ ९.९१.३
पदार्थ : (वृषा) कामनाओं की वृष्टि करनेवाला परमात्मा (वृष्णे) कर्म्मयोगी के लिये (रोरुवद्) अत्यन्त शब्द करता हुआ (अस्मै) इस कर्म्मयोगी के लिये (अंशुः) सर्वव्यापक और (पवमानः) सबको पवित्र करने के लिये परमात्मा (रुशत्) दीप्ति देता हुआ (गोः) इन्द्रियों के (पयः) सारभूत ज्ञान को (ईर्ते) प्राप्त होता है। जिससे (सहस्रं ऋक्वा) अनन्त प्रकार की वाणियों का वक्ता (वचोवित्) वाणियों का ज्ञाता (पथिभिः) वाणियों की रास्ते से जो (अध्वस्मभिः) हिंसारहित है, उनसे (सूरः) विज्ञानी (अण्वं) सूक्ष्म पदार्थों के तत्त्व को (वियाति) प्राप्त होता है ॥३॥
भावार्थ : जो लोग वेदवाणियों का अभ्यास करते हैं, वे सूक्ष्म से सूक्ष्म पदार्थों को प्राप्त होते हैं ॥३॥
In Sanskrit:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : वृषा॑ । वृष्णे॑ । रोरु॑वत् । अं॒शुः । अ॒स्मै॒ । पव॑मानः । रुश॑त् । ई॒र्ते॒ । पयः॑ । गोः । स॒हस्र॑म् । ऋक्वा॑ । प॒थिऽभिः॑ । व॒चः॒ऽवित् । अ॒ध्व॒स्मऽभिः॑ । सूरः॑ । अण्व॑म् । वि । या॒ति॒ ॥ ९.९१.३
भावार्थ :