Rigveda / 9 / 92 / 4
तव॒ त्ये सो॑म पवमान नि॒ण्ये विश्वे॑ दे॒वास्त्रय॑ एकाद॒शास॑: । दश॑ स्व॒धाभि॒रधि॒ सानो॒ अव्ये॑ मृ॒जन्ति॑ त्वा न॒द्य॑: स॒प्त य॒ह्वीः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 92 | Mantra No : 4
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRittriShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : tava tye soma pavamaana niNye vishve devaastraya ekaadashaasaH . dasha svadhaabhiradhi saano avye mRRijanti tvaa nadyaH sapta yahviiH .
Component Words : tava . tye . soma . pavamaana . niNye . vishve . devaaH . trayaH . ekaadashaasaH . dasha . svadhaabhiH . adhi . saanau . avye . mRRijanti . tvaa . nadyaH . sapta . yahviiH . 9.92.4
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : तव॑ । त्ये । सो॒म॒ । प॒व॒मा॒न॒ । नि॒ण्ये । विश्वे॑ । दे॒वाः । त्रयः॑ । ए॒का॒द॒शासः॑ । दश॑ । स्व॒धाभिः॑ । अधि॑ । सानौ॑ । अव्ये॑ । मृ॒जन्ति॑ । त्वा॒ । न॒द्यः॑ । स॒प्त । य॒ह्वीः ॥ ९.९२.४
पदार्थ : (विश्वे देवाः) सम्पूर्ण देव जो (त्रयः, एकादशासः) ३३ हैं, वे (निण्ये) अन्तरिक्ष में वर्तमान हैं। (सोम) हे सर्वोत्पादक परमात्मन् ! (त्ये) वे (तव) तुम्हारे लिये (दश) पाँच सूक्ष्म भूत और पाँच स्थूल भूतों की (स्वधाभिः) सूक्ष्मशक्तियों द्वारा (अधिसानौ) तुम्हारे सर्वोपरि उच्चस्वरूप में (अव्ये) जो सर्वरक्षक हैं, उसमें (मृजन्ति) संशोधन करनेवाले हैं और (त्वां) तुझको (सप्त, यह्वीः, नद्यः) जो बड़ी सात नाड़ियाँ हैं, उनके द्वारा प्राप्त होते हैं ॥४॥
भावार्थ : इस मन्त्र में योगविद्या का वर्णन किया है और सप्तनद्यः से तात्पर्य सात प्रकार की नाड़ियों का है, जिनको इड़ा, पिङ्गलादि नामों से कथन किया जाता है। तात्पर्य यह है कि योगी पुरुष उक्त नाड़ियों के द्वारा संयम करके परमात्मयोगी बनें अर्थात् परमात्मा में युक्त हों ॥४॥
In Sanskrit:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : तव॑ । त्ये । सो॒म॒ । प॒व॒मा॒न॒ । नि॒ण्ये । विश्वे॑ । दे॒वाः । त्रयः॑ । ए॒का॒द॒शासः॑ । दश॑ । स्व॒धाभिः॑ । अधि॑ । सानौ॑ । अव्ये॑ । मृ॒जन्ति॑ । त्वा॒ । न॒द्यः॑ । स॒प्त । य॒ह्वीः ॥ ९.९२.४
भावार्थ :