Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 6 / 75 / 15

आला॑क्ता॒ या रुरु॑शी॒र्ष्ण्यथो॒ यस्या॒ अयो॒ मुख॑म्। इ॒दं प॒र्जन्य॑रेतस॒ इष्वै॑ दे॒व्यै बृ॒हन्नमः॑ ॥१५॥

Veda : Rigveda | Mandal : 6 | Sukta : 75 | Mantra No : 15

In Hindi:

ऋषि : पायुर्भारद्वाजः | देवता : इषवः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय : फिर रानी कैसी हो, इस विषय को कहते हैं ॥

पदपाठ : आल॑ऽअक्ता। या। रुरु॑ऽशीर्ष्णी। अथो॒ इति॑। यस्याः॑। अयः॑। मुख॑म्। इ॒दम्। प॒र्जन्य॑ऽरेतसे। इष्वै॑। दे॒व्यै। बृ॒हत्। नमः॑ ॥१५॥

पदार्थ : (या) जो (आलाक्ता) विष से युक्त (रुरुशीर्ष्णी) रुरु जाति के मृग के शिर के समान जिसका शिर और (अथो) इसके अनन्तर (यस्याः) जिसका (इदम्) (अयः) लोहेयुक्त (मुखम्) मुख है उस धारण करनेवाली (पर्जन्यरेतसे) मेघ के जल के समान वीर्यवती (देव्यै) दिव्य और (इष्वै) गमन करती हुई शूरवीर स्त्री के लिये (बृहत्) बहुत (नमः) अन्न हो ॥१५॥

भावार्थ : हे मनुष्यो ! जो रानी धुनर्वेद जानती हुई शस्त्र-अस्त्र फेंकनेवाली है, उसका वीरों को निरन्तर सत्कार करना चाहिये ॥१५॥