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Samveda/976

इन्दो यथा तव स्तवो यथा ते जातमन्धसः। नि बर्हिषि प्रिये सदः॥९७६

Veda : Samveda | Mantra No : 976

In Hindi:

ऋषि : अवत्सारः काश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा की स्तुति के साथ उससे प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : इन्दो ।यथा।तव।स्तवः। यथा। ते ।जातम् ।अन्धसः। नि। बर्हिषि ।प्रिये ।सदः॥

पदार्थ : हे (इन्दो) चन्द्रमा के समान आह्लादक प्रेममय प्रभो ! (यथा) जैसी महान् (तव) आपकी (स्तवः) स्तुति एवं महिमा है और (यथा) जितना महान् (ते) आपके (अन्धसः) आनन्दरस का (जातम्) समूह है, वैसे ही महान् आप हमारे (प्रिये बर्हिषि) प्रिय हृदयासन पर (नि सदः) बैठिए ॥२॥

भावार्थ : अपनी महिमा के अनुरूप महान् रसमय जगदीश्वर हमें प्राप्त होकर आनन्दरस से सराबोर कर दे ॥२॥