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Samveda/1189

पवन्ते वाजसातये सोमाः सहस्रपाजसः। गृणाना देववीतये॥११८९

Veda : Samveda | Mantra No : 1189

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में ब्रह्मानन्द-रसों का वर्णन है।

पदपाठ : पवन्ते ।वाजसातये ।वाज ।सातये ।सोमाः ।सहस्रपाजसः ।सहस्र ।पाजसः ।गृणानाः ।देववीतये ।देव ।वीतये॥

पदार्थ : (सहस्रपाजसः) सहस्रों बलोंवाले (सोमाः) परमानन्द-रस (गृणानाः) स्तुति किये जाते हुए (वाजसातये) बल देने के लिए और (देववीतये) दिव्यगुण उत्पन्न करने के लिए (पवन्ते) प्रवाहित हो रहे हैं ॥३॥

भावार्थ : परब्रह्म के पास से परमानन्द प्राप्त करके उपासक जन ब्रह्मबल से युक्त और दिव्य गुणोंवाले हो जाते हैं ॥३॥