Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1203

आ पवमान धारय रयि सहस्रवर्चसम्। अस्मे इन्दो स्वाभुवम्॥१२०३

Veda : Samveda | Mantra No : 1203

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : आ। पवमान ।धारय ।रयिम् ।सहस्रवर्चसम् ।सहस्र ।वर्चसम् ।अस्मेइति ।इन्दो ।स्वाभुवम्। सु ।आभुवम्॥

पदार्थ : हे (पवमान) पवित्रता देनेवाले (इन्दो) रस से भिगोनेवाले परमात्मन् ! आप (अस्मे) हम में (सहस्र-वर्चसम्) अनन्त ब्रह्मवर्चस से युक्त, (स्वाभुवम्) अतिशय व्यापक (रयिम्) दिव्य आनन्द रूप धन को (धारय) स्थापित करो ॥८॥

भावार्थ : परमेश्वर के उपासक आयुष्मान् तेजस्वी, ब्रह्मवर्चस्वी, दिव्य आनन्द से युक्त, विद्वान् और श्रीमान् बनते हैं ॥८॥