Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1323

त्व सोमासि धारयुर्मन्द्र ओजिष्ठो अध्वरे। पवस्व महयद्रयिः॥१३२३

Veda : Samveda | Mantra No : 1323

In Hindi:

ऋषि : भरद्वाजो बार्हस्पत्यः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रथम मन्त्र में परमेश्वर के गुणों का वर्णन करके उससे प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : त्वम् । सोम । असि । धारयुः । मन्द्रः । ओजिष्ठ । अध्वरे । पवस्य । महयद्रयिः । महयत् । रयिः॥ ।

पदार्थ : हे (सोम) जगत् के रचयिता रसनिधि परमात्मन् ! (त्वम्) आप (धारयुः) आनन्द-धाराओं को देने के इच्छुक, (मन्द्रः) तृप्त करनेवाले और (ओजिष्ठः) सबसे अधिक ओजस्वी (असि) हो। (मंहयद्रयिः) जिनका धन वृद्धि प्रदान करनेवाला वा कीर्ति देनेवाला है, ऐसे आप (अध्वरे) जीवन-यज्ञ में (पवस्व) हमें पवित्र करते हो ॥१॥

भावार्थ : सब मनुष्य परमात्मा की आराधना करके पुण्य, धन, आनन्द और सन्तुष्टि को अपने जीवन में प्राप्त करें ॥१॥