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Samveda/1384

अच्छा नो याह्या वहाभि प्रयासि वीतये। आ देवान्त्सोमपीतये॥१३८४

Veda : Samveda | Mantra No : 1384

In Hindi:

ऋषि : भरद्वाजो बार्हस्पत्यः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।

पदपाठ : अच्छ । नः । याहि । आ । वह । अभि । प्रयासि । वीतये । आ । देवान् । सोमपीतये । सोम । पीतये॥

पदार्थ : हे अग्ने ! हे परमात्मन् ! आप (नः अच्छ) हमारी ओर (आयाहि) आओ, (वीतये) प्रगति के लिए (प्रयांसि) शान्तरसों को (अभि वह) प्राप्त कराओ, (देवान्) विद्वानों को (सोमपीतये) वीर रस के पान के लिए (आ) प्रेरित करो ॥२॥

भावार्थ : संसार में सब लोग वीर होकर शान्ति का प्रसार करें ॥२॥