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सभाप्रकरणम्

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : ६. सभाप्रकरणम्।

१ इदानीं सभायां काचिच्चर्च्चा विधेया। अब सभा में कुछ वार्तालाप करना चाहिये।

२ धर्म्मः किं लक्षणोऽस्तीति पृच्छामि? मैं पूछता हूँ कि धर्म्म का क्या लक्षण है?

३ [यो] वेदप्रतिपाद्यो न्याय्यः पक्षपात-रहितो वर्तते। यश्च परोपकार सत्या-चरणलक्षणो धर्मोऽस्तीत्युत्तरम्। जो वेदोक्त, न्यायानुकूल, पक्षपातरहित है। और जो पराया उपकार तथा सत्याचरण युक्त है उसी को धर्म जानना चाहिये।

४ ईश्वरः कोऽस्तीति ब्रूहि? ईश्वर किसको कहते हैं, आप कहिये।

५ यस्सच्चिदानन्दस्वरूपः सत्यगुण-कर्मस्वभावः। जो सत् चित् आनन्दस्वरूप और जिसके गुण, कर्म, स्वभाव सत्य ही हैं, वह ईश्वर है।

६ मनुष्यैः परस्परं कथं कथं वर्त्तितव्यम्? मनुष्यों को एक दूसरे के साथ कैसे-कैसे वर्त्तना चाहिये?

७ धर्मसुशीलतापरोपकारैः सह यथायोग्यम्। धर्म, श्रेष्ठ स्वभाव और परोपकार के साथ जिनसे जैसा व्यवहार करना योग्य हो वैसा ही सबको वर्त्तना चाहिये।