In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : ८. राजप्रजालक्षणराजनीत्यनीतिप्रकरणम्
१ राजा को भवितुं शक्नोति? राजा कौन हो सकता है?
२ यो धार्मिकाणां सभाया अधिपतित्वे योग्यो भवेत्। जो धर्मात्माओं की सभा का स्वामी होने को योग्य होवे।
३ यदि प्रजां पीडयित्वा स्वार्थं साधयेत् स राजा भवितुमर्होऽस्ति न वा? जो प्रजा को दुःख देकर अपना मतलब साधे, वह राजा हो सकता है वा नहीं?
४ नहि नहि नहि, स तु दस्युः खलु। नहीं नहीं नहीं, वह तो डाकू ही है।
५ या राजद्रोहिणी सा तु न प्रजा किन्तु स्तेनेन तुल्या मन्तव्या। जो राजव्यवहार में विरोध करे, वह प्रजा तो नहीं, किन्तु उसको चोर के समान जानना चाहिये।
६ कथंभूता जनाः प्रजा भवितुमर्हाः? कैसे मनुष्य प्रजा होने को योग्य हैं?
७ ये धार्मिकाः सततं राजप्रियकारिणः। जो निरन्तर धर्मात्मा और राजसम्बन्ध में प्रेम रक्खें।
८ राजपुरुषैरप्येवमेव प्रजाप्रियकारिभिः सदा भवितव्यम्। राजसम्बन्धी पुरुषों को भी वैसे ही प्रजा के हित करने में सदा रहना चाहिये।