In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : १२. नौकाविमानादिचालनप्रकरणम्
१ त्वं नौकाश्चालयसि न वा? तू नावें चलाता है वा नहीं?
२ चालयामि। चलाता हूँ।
३ नदीषु वा समुद्रे? नदियों अथवा समुद्र में?
४ उभयत्र चलन्ति। दोनों में चलती हैं।
५ कस्यां दिशि कस्मिन्देशे गच्छन्ति? किस दिशा और किस देश में जाती हैं?
६ सर्वासु दिक्षु पातालदेशपर्य्यन्तम्। सब दिशाओं में पातालदेश अर्थात् अमेरिका देश पर्य्यन्त।
७ ताः कीदृश्यः सन्ति केन चलन्ति? वे नौका कैसी हैं और किससे चलती हैं?
८ कैवर्त्तवाय्वग्निजलकलावाष्पादिभिः। मल्लाह, वायु, अग्नि, जल, कला यन्त्र और भाफ [भाप] आदि से।
९ याः पुरुषाश्चालयन्ति ता ह्रस्वा महत्यस्ता वाय्वादिभिस्ता अश्वतरी-श्यामकर्णाश्वायुक्ताख्याः सन्ति। या जिनको मनुष्य चलाते हैं वे छोटी छोटी नौका और जो बड़ी होती हैं वे वायु आदि से चलाई जाती हैं, उनके अश्वतरी और श्यामकर्णाश्वा आदि नाम हैं।
१० विमानादिभिरपि सर्वत्र गच्छाम आगच्छामश्च। और विमान आदि से भी सर्वत्र जाया-आया करते हैं।