In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : ४२. आत्मीयप्रकरणम्
१ तव ज्येष्ठो बन्धुर्भगिनी च काऽस्ति? तेरा बड़ा भाई और बहिन कौन हैं?
२ देवदत्तस्सुशीला च। देवदत्त और सुशीला।
३ भो बन्धो! अहं पाठाय व्रजामि। हे भाई! मैं पढ़ने के लिये जाता हूँ।
४ अत्युत्तमा वार्त्ता प्रिय! याहि समभ्यस्य पूर्णा विद्याः पठित्वैवागन्तव्यम्।
[गच्छ प्रिय! पूर्णां विद्यां कृत्वा- गन्तव्यम्।*]
[*१. संख्या ४ का पाठ मूल पाण्डुलिपि में है तथा कोष्ठान्तर्गत पाठ प्रथम संस्करण में है। —सम्पादक] हे प्रिय भाई! तूने बहुत उत्तम बात विचारी१ जा! अच्छे प्रकार अभ्यास से पूर्ण विद्या पढ़ ही के आना।
[जा प्यारे! पूरी विद्या को करके आना*१]
[*१. संख्या ४ का पाठ मूल पाण्डुलिपि में है तथा कोष्ठान्तर्गत पाठ प्रथम संस्करण में है। —सम्पादक]
५ भवतः कन्या अद्यश्वः किं पठन्ति? आपकी बेटियाँ आजकल क्या पढ़ती हैं?
६ वर्णोच्चारणशिक्षादिकं पठित्वेदानीं दर्शनशास्त्राण्यधीत्य धर्मपाकशिल्पगणितविद्या अधीयते। वर्णोच्चारण शिक्षादि और न्याय शास्त्रादि पढ़कर अब धर्म, पाक, शिल्प और गणित विद्या पढ़ती हैं।
७ भवज्ज्येष्ठया भगिन्या किं किमधीत्येदानीं किं क्रियते? आपकी बड़ी बहन क्या-क्या पढ़के, अब क्या करती है?
८ वर्णज्ञानमारभ्य वेदपर्यन्ताः सर्वा विद्या विदित्वेदानीं बालिकाः पाठयति। अक्षराभ्यास से लेके वेद तक सब पूरी विद्या पढ़ के अब कन्याओं को पढ़ाया करती है।
९ तया विवाहः कृतो न वा? उसने विवाह किया वा नहीं?
१० इदानीं तु न कृतः परन्तु वरं परीक्ष्य स्वयंवरं कर्तुमिच्छति। अभी तक तो नहीं किया, परन्तु वर की परीक्षा करके स्वयंवर करने की इच्छा करती है।
११ यदा कश्चित् स्वतुल्यः पुरुषो मिलिष्यति तदा विवाहं करिष्यति। जब कोई अपने सदृश पुरुष मिलेगा तब विवाह करेगी।
१२ तव मित्रैरधीतं न वा? तेरे मित्रों ने पढ़ा है वा नहीं?
१३ सर्व एव विद्वांसो वर्त्तन्ते यथाऽहं तथैव तेऽपि, कुतः, समानस्वभावेषु मैत्र्यास्सम्भवात्। सब ही विद्वान् पण्डित हैं, जैसा मैं हूँ वैसे वे भी हैं, क्योंकि तुल्य स्वभाववालों में मित्रता का सम्भव है।
१४ तव पितृव्यः किं करोति? तेरा चाचा क्या करता है?
१५ राज्यव्यवस्थाम्। राज्य का कारबार।
१६ अयं तव मातुलोऽस्ति किम्? यह तेरा मामा है क्या?
१७ अयं मातुल इयं पितृष्वसेयं मातृष्वसेयं गुरुपत्न्ययं च गुरुः। यह मेरा मामा, यह बाप की बहिन (बुवा), यह माता की बहिन (मौसी), यह गुरु की स्त्री और यह मेरा गुरु है।
१८ इदानीमेते कस्मै प्रयोजनायैकत्र मिलिताः? इस समय ये सब किसलिये मिलकर इकट्ठे हुए हैं?
२९ मया सत्कारायाऽऽहूताः सन्त आगताः। मैंने सत्कार पूर्वक बुलाये हैं, सो ये सब आये हैं।
२० इमे मम पितृश्वश्रूश्वशुरश्यालादयः सन्ति। ये सब मेरे पिता की सास, ससुर और साले आदि हैं।
११ इमे मम मित्रस्य स्त्रीभगिनीदुहितृ-जामातरः सन्ति। ये मेरे मित्र की स्त्री, बहिन, लड़की और जमाई हैं।
२२ इमौ मम पितृव्यस्य श्यालदौहित्रौ स्तः। ये मेरे चाचा का साला और दौहित्र हैं।