In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे “इन्द्र” परमैश्वर्ययुक्तेश्वर! “मा नो वधीः” हमारा वध मत कर, अर्थात् अपने-से अलग हमको मत गिरावै। “मा परा दाः” हमसे अलग आप कभी मत हो “मा नः प्रिया॰” हमारे प्रिय भोगों को मत चोर और मत चोरवावै, “आण्डा मा॰” हमारे गर्भों का विदारण मत कर। हे “मघवन्” सर्वशक्तिमन्! “शक्र” समर्थ! हमारे पुत्रों का विदारण मत कर। “मा नः, पात्राः” हमारे भोजनाद्यर्थ सुवर्णादि पात्रों को हमसे अलग मत कर। “सहजानुषाणि” जो-जो हमारे सहज अनुषक्त, स्वभाव से अनुकूल मित्र हैं, उनको आप नष्ट मत करो, अर्थात् कृपा करके पूर्वोक्त सब पदार्थों की यथावत् रक्षा करो॥४९॥