मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नो॑ अर्भ॒कं मा न॒ उक्ष॑न्तमु॒त मा न॑ उक्षि॒तम्।
मा नो॑ वधीः पि॒तरं॒ मोत मा॒तरं॒ मा नः॑ प्रि॒यास्त॒न्वो॑ रुद्र रीरिषः॥५०॥ ऋ॰ १।८।६।२
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In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे “रुद्र” दुष्टविनाशकेश्वर! आप हमपर कृपा करो “मा नो महान्तम्” हमारे ज्ञानवृद्ध और वयोवृद्ध पिता इनको आप नष्ट मत करो तथा “मा नो अर्भकम्” छोटे बालक और “उक्षन्तम्” वीर्यसेचन-समर्थ जवान तथा जो गर्भ में वीर्य को सेचन किया है, उसको मत विनष्ट करो तथा हमारे पिता, माता और प्रिय तनुओं (शरीरों)का “मा, रीरिषः” हिंसन मत करो॥५०॥