In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे इन्द्र! आप परमैर्श्ययुक्त सब संसार के राजा हो, सर्वप्रकाशक हो। हे रक्षक! आप कृपा से “नः” हम लोगों के “द्विपदे” जो पुत्रादि, उनके लिए परमसुखदायक होओ तथा “चतुष्पदे” हस्ती, अश्व और गवादि पशुओं के लिए भी परमसुखकारक होओ, जिससे हम लोगों को सदा आनन्द ही रहे॥२१॥