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Choose Sutra

प्रवाह से अनादि पदार्थ

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो कार्य जगत्, जीव के कर्म और जो इनका संयोग वियोग है, ये तीन 'परम्परा से अनादि' हैं ।