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अनादि का स्वरूप

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो न कभी उत्पन्न हुआ हो, जिसका कारण कोई भी न होवे, अर्थात् जो सदा से स्वयं सिद्ध हो के, सदा वर्तमान रहे, वह ‘अनादि' कहलाता है।