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Choose Sutra

स्वभाव

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जिस वस्तु का जो स्वाभाविक गुण है, जैसे कि अग्नि में रूप और दाह, अर्थात् जब तक वह वस्तु रहे, तब तक उसका वह गुण भी नहीं छूटता, इसलिये इसको 'स्वभाव' कहते हैं ।