Rigveda / 8 / 5 / 7
आ न॒: स्तोम॒मुप॑ द्र॒वत्तूयं॑ श्ये॒नेभि॑रा॒शुभि॑: । या॒तमश्वे॑भिरश्विना ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 5 | Mantra No : 7
In English:
Seer : brahmaatithiH kaaNvaH | Devta : ashvinau | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : aa naH stomamupa dravattuuya.m shyenebhiraashubhiH . yaatamashvebhirashvinaa .
Component Words : aa . naH . stomam . upa . dravat . tuuyam . shyenebhiH . aashu.abhiH . yaatam . ashvebhiH . ashvinaa . 8.5.7
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मातिथिः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : आ । नः॒ । स्तोम॑म् । उप॑ । द्र॒वत् । तूय॑म् । श्ये॒नेभिः॑ । आ॒शुऽभिः॑ । या॒तम् । अश्वे॑भिः । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.५.७
पदार्थ : (अश्विना) हे ज्ञानयोगी तथा कर्मयोगी ! आप (द्रवत्) उच्चारण किये हुए (नः, स्तोत्रम्, उप) हमारे स्तोत्र के अभिमुख (आशुभिः, श्येनेभिः) शीघ्रगामी शस्त्रों सहित (अश्वेभिः) अश्वों द्वारा (तूयम्) शीघ्र (आयातम्) आवें ॥७॥
भावार्थ : विद्वज्जनों की ओर से प्रार्थना है कि हे कर्मयोगिन् तथा ज्ञानयोगिन् ! हमारे क्षात्रधर्मसम्बन्धी स्तोत्रों के उच्चारणकाल में आप सशस्त्र शीघ्र आवें और आकर क्षात्रधर्म का महत्त्व तथा शस्त्रों की प्रयोगविधि का श्रवण करें, जिससे हमारा ज्ञान वृद्धि को प्राप्त हो ॥७ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : ब्रह्मातिथिः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : आ । नः॒ । स्तोम॑म् । उप॑ । द्र॒वत् । तूय॑म् । श्ये॒नेभिः॑ । आ॒शुऽभिः॑ । या॒तम् । अश्वे॑भिः । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.५.७
भावार्थ :