Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1416

न किरस्य सहन्त्य पर्येता कयस्य चित्। वाजो अस्ति श्रवाय्यः॥१४१६

Veda : Samveda | Mantra No : 1416

In Hindi:

ऋषि : शुनः शेप आजीगर्तिः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमेश्वर की कृपा का फल वर्णित है।

पदपाठ : न । किः । अस्य । सहन्त्व । पर्यता । परि । एता । कयस्य । चित् । वाजः । अस्ति । श्रवाय्यः॥

पदार्थ : हे (सहन्त्य) शत्रुओं को तिरस्कृत करनेवाले अग्रणी परमात्मन् ! (कयस्य चित्) युद्ध विद्या के ज्ञाता (अस्य) इस आपके स्तोता को (पर्येता) घेरनेवाला वा उस पर आक्रमण करनेवाला (न किः) कोई नहीं होता, प्रत्युत (वाजः) युद्ध (श्रवाय्यः) उसका यश फैलानेवाला (अस्ति) होता है ॥२॥

भावार्थ : जिस पर जगदीश्वर कृपा करता है, उसे युद्ध में कोई भी हरा नहीं सकता, अपितु वह विजयश्री को प्राप्त करता है ॥२॥