Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1577

इन्द्राग्नी अपसस्पर्युप प्र यन्ति धीतयः। ऋतस्य पथ्या अनु॥१५७७

Veda : Samveda | Mantra No : 1577

In Hindi:

ऋषि : विश्वामित्रो गाथिनः | देवता : इन्द्राग्नी | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : आगे फिर जीवात्मा और परमात्मा का ही विषय उपदिष्ट है।

पदपाठ : इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । अपसः । परि । उप । प्र । यन्ति । धीतयः । ऋतस्य । पथ्याः । अनु॥

पदार्थ : हे (इन्द्राग्नी) जीवात्मन् और परमात्मन् ! (धीतयः) ध्यानकर्ता लोग (ऋतस्य) सत्य के (पथ्याः) मार्गों का (अनु) अनुसरण करते हुए (अपसः परि) धर्म कर्मों के पार पहुँच कर, तुम दोनों को (उप प्र यन्ति) प्राप्त कर लेते हैं ॥३॥

भावार्थ : जीवन में सत्य मार्ग का अनुसरण और परमेश्वर की प्राप्ति, यह मनुष्य का लक्ष्य है ॥३॥