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Samveda/1600

स्तोत्र राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते। विभूतिरस्तु सूनृता॥१६००

Veda : Samveda | Mantra No : 1600

In Hindi:

ऋषि : शुनः शेप आजीगर्तिः | देवता : इन्द्रः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में इन्द्र परमेश्वर की स्तुति है।

पदपाठ : स्तोत्रम् । राधानाम् । पते । गिर्वाहः । वीर । यस्य । ते । विभूतिः । वि । भूतिः । अस्तु । सूनृता॥

पदार्थ : हे (राधानां पते) ऐश्वर्यों के स्वामिन् ! (गिर्वाहः) वेदवाणियों से प्राप्त करने योग्य (वीर) शूरवीर परमात्मन् ! (यस्य ते) जिन आपका (स्तोत्रम्) स्तुतिकीर्तन सब जगह होता है, उन आपकी (सूनृता) सत्य, प्रिय और मधुर वेदवाणी, हमारे लिए (विभूतिः) वैभव देनेवाली (अस्तु) होवे ॥२॥

भावार्थ : वेदों को पढ़कर, उनमें विद्यमान सब विद्याओं को जानकर सब मनुष्य वैभवशाली और ब्रह्म का साक्षात्कार करनेवाले होवें ॥२॥