Donation Appeal Download Our App
Saadhana Paada / Means / 48
Choose Sutra
Saadhana Paada / Means / 48

ततो द्वन्द्वानभिघातः॥४८॥

Padas Name : Saadhana Paada / Means | Sutra No : 48

In Hindi:

पदपाठ : ततः द्वन्द्वानभिघातः॥

हिंदी में अर्थ : (ततः) आसन की सिद्धि हो जाने से (द्वन्द्वानभिघातः) द्वन्द्व = शीत-उष्ण, भूख-प्यास आदि से साधक पीडि़त नहीं होता॥

महर्षि दयानन्द कृत अर्थ : (ततो द्वन्द्व०) जब आसन दृढ़ होता है, जब उपासना करने में कुछ परिश्रम करना नहीं पड़ता और न सर्दी, गर्मी अधिक बाधा करती है॥ (ऋ० भू॰ उपासना॰)

व्यास भाष्य : शीतोष्णादिभिर्द्वन्द्वैरासनजयान्नाभिभूयते॥

हिंदी में अर्थ : (आसनजयात्) आसन की सिद्धि हो जाने पर साधक (शीतोष्णादिभिः) शीत-उष्ण, भूख-प्यास आदि (द्वन्द्वैः) द्वन्द्वों के कारण (अनाभिभूयते) अभिभूत = बाधित = पीडि़त नहीं होता॥

वैदिक योग मीमांसा : प्रस्तुत सूत्र में आसनजय का फल कहा है। जब साधक बाह्य शारीरिक प्रयत्न की शिथिलता और अनन्त परमात्मा में चित्त को लगाकर आसन की स्थिरता और सुखरूपता को प्राप्त कर लेता है, तब साधक = योगी को शीत-उष्ण, भूख-प्यास आदि द्वन्द्व, साधना काल में पीडि़त नहीं करते। आसनजय से योगी की वृत्ति आन्तरिक हो जाने पर, बाह्य-शरीर सम्बन्धी द्वन्द्व = शीत-उष्ण आदि योगी के चित्त की एकाग्रता को भंग करने में समर्थ नहीं होते। उसका शारीरिक सामर्थ्य इतना बढ़ जाता है कि सामान्य स्तर से अधिक शीतता अथवा उष्णता, इसी प्रकार भूख-प्यास आदि उसे उद्वेलित = बाधित = पीडि़त नहीं करते और शरीर की क्षमता के अनुसार वह इन द्वन्द्वों को सामान्य रूप से सहन करने में समर्थ हो जाता है। इस प्रकार बाह्य प्रयत्नों = चेष्टाओं को निरोध कर साधक अध्यात्म पथ पर सुगमता पूर्वक चलकर चित्त को एकाग्र करने में समर्थ होता है॥