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Saadhana Paada / Means / 53
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Saadhana Paada / Means / 53

धारणासु च योग्यता मनसः॥५३॥

Padas Name : Saadhana Paada / Means | Sutra No : 53

In Hindi:

पदपाठ : धारणासु च योग्यता मनसः॥

संस्कृत में सूत्र की भूमिका : किञ्च—

हिंदी में अर्थ : (किम् च) प्राणायाम से और क्या लाभ होता है —

हिंदी में अर्थ : (च) और प्राणायाम के अभ्यास से (धारणासु) धारणाओं में (मनसः) मन की (योग्यता) योग्यता होती है॥

महर्षि दयानन्द कृत अर्थ : उस अभ्यास से यह भी फल होता है कि (किंच धारणा॰) परमेश्वर के बीच में मन और आत्मा की धारणा होने से मोक्षपर्यन्त उपासना योग और ज्ञान की योग्यता बढ़ती जाती है, तथा उससे व्यवहार और परमार्थ का विवेक भी बराबर बढ़ता रहता है॥ (ऋ० भू॰ उपासना॰)

व्यास भाष्य : प्राणायामाभ्यासादेव। प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य (योगसूत्र १.३४) इति वचनात्॥

हिंदी में अर्थ : (प्राणायामाभ्यासात्) प्राणायाम के अभ्यास से (एव) ही मन की धारणाओं में योग्यता होती है। यह “प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य” (योगसूत्र १.३४) (इति वचनात्) इस सूत्र से सिद्ध है॥

वैदिक योग मीमांसा : प्राणायाम का एक फल है — चित्त में विवेकज्ञान को आवरण करने वाले अज्ञान, अविद्या की क्षीणता होती; और दूसरा फल यह है कि इस प्रकार से क्षीण-दोषों वाला चित्त धारणा की योग्यता को प्राप्त करता है। साधक, चित्त को जिस विषय एवं देश में एकाग्र करना चाहता है, वह चित्त को उस विषय और देश में एकाग्र करने में समर्थ होता है।

महर्षि पतञ्जलि ने चित्त की स्थिरता हेतु विभिन्न परिकर्मों में एक परिकर्म प्राणायाम को योगसूत्र १.३४ में कहा है। प्राणायाम रूपी परिकर्म से चित्त की एकाग्रता सम्पादन का वर्णन सूत्र १.३४ की व्याख्या में, वेदादि सत्यशास्त्रों के प्रमाणपूर्वक, किया है। महर्षि व्यास ने भी चित्त द्वारा धारणा की योग्यता की प्राप्ति हेतु इसी सूत्र का प्रमाण भाष्य में दिया है।

महर्षि दयानन्द ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका के उपासना विषय में प्राणायाम से लाभ को विशेषता पूर्वक कहते हैं। उनके अनुसार साधक के मन और आत्मा की धारणा परमेश्वर में होने से मुक्तिपर्यन्त विवेक और ज्ञान की योग्यता बढ़ती है। वे सूत्र पर व्यासभाष्य के उपरान्त संस्कृत में लिखते हैं — “प्राणायामानुष्ठानेनोपासकानां मनसो ब्रह्मध्याने सम्यग्योग्यता भवति।” अर्थात् प्राणायाम के अनुष्ठान से उपासकों के मन में परमात्मा के ध्यान की सम्यक् योग्यता उत्पन्न होती है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।