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महर्षि दयानन्द व्याख्या : १०. वैश्यव्यवहारप्रकरणम्
१ वैश्याः कथं वर्त्तेरन्? बनिये लोग कैसे वर्त्तें?
२ सर्वा देशभाषा विज्ञाय व्यापारकुसीदवृत्तिकृषिकर्माणि धर्मेण कुर्युः। वैश्य लोग सब देशभाषा और हिसाब को पशुपालनक्रयविक्रयादि- ठीक-ठीक जानकर पशुओं की रक्षा, लेन-देन आदि व्यवहार, ब्याजवृत्ति और खेती आदि कर्म धर्म से किया करें।