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सेव्यसेवकप्रकरणम्

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : २३. सेव्यसेवकप्रकरणम्।

१ भो मङ्गलदास! सेवार्थ कैङ्कर्यं करिष्यसि? हे मंगलदास! सेवा के लिये नौकरी करेगा?

२ करिष्यामि। करूंगा।

३ किं प्रतिमासं मासिकं ग्रहीतुमिच्छसि? प्रति महीने कितना मासिक लेने को चाहता है?

४ पञ्च रूप्याणि। पांच रुपये।

५ मयैतावद्दास्यते परन्तु यदि यथायोग्या परिचर्य्या विधेया। मैं इतना दूंगा, परन्तु जो तू ठीक-ठीक सेवा करेगा।

६ यदाहं भवन्तं सेविष्ये तदा भवानपि प्रसन्न एव भविष्यति। जब मैं आपकी सेवा करूंगा तब आप भी प्रसन्न होंगे।

७ मार्जनं कुरु।*२

[*२. यह वाक्य मूल पुस्तक में है, प्रथम संस्करण में नहीं है।] झाडू दे।*२

[*२. यह वाक्य मूल पुस्तक में है, प्रथम संस्करण में नहीं है।]

८ दन्तधावनमानय। दातून ले आ।

९ स्नानार्थं जलमानय। नहाने के लिये जल ला।

१० उपवस्त्रं देहि। अंगोछा दे।

११ आसनं स्थापय। आसन रख।

१२ पाकं कुरु। रसोई कर।

१३ हे सूद! त्वयाऽन्नं व्यञ्जनं च सुष्ठु सम्पादनीयम्। हे रसोइये! तू अन्न और शाक आदि उत्तम बना।

१४ अद्य किं किं कुर्याम्? आज क्या क्या करूं?

१५ पायसमोदकौदनसूपरोटिकाशाकान्युपव्यञ्जनानि चापि। खीर, लड्डू, भात, दाल, रोटी, शाक और चटनी आदि भी।