In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : २७. मिश्रितप्रकरणम् [२]
१ इदानीं शीतं निवृत्तम्, उष्णसमय आगतः। अब तो शीत की निवृत्ति होकर गरमी का समय आया।
२ हेमन्ते क्व स्थितः? जाड़े में कहां रहा था?
[३ वंगेषु।]*१
[*१. यह पाठ मूल और प्रथम संस्करण में नहीं है, बाद के संस्करणों में बढ़ाया है।] बङ्गाल में।]*१
[*१. यह पाठ मूल और प्रथम संस्करण में नहीं है, बाद के संस्करणों में बढ़ाया है।
४ पश्य! मेघोन्नतिं कथं गर्जति विद्योतते च। देखो! मेघ की बढ़ती, कैसा गर्जता और चमकता है।
५ अद्य महती वृष्टिर्जाता यया तडागा नद्यश्च पूरिताः। आज बड़ी वर्षा हुई जिससे तलाब और नदियां भर गईं।
६ शृणु, मयूराः सुशब्दयन्ति। सुनो, मोर अच्छा शब्द करते हैं।
७ कस्मात् स्थानादागतः? किस स्थान से आया?
८ जङ्गलात्। जङ्गल से।
९ तत्र त्वया कदापि सिंहो दृष्टो न वा? वहां तूने कभी सिंह देखा था वा नहीं?
१० बहुवारं दृष्टः। कई वार देखा।
११ नदी पूर्णा वर्त्तते कथमागतः? नदी भरी है, कैसे आया?
१२ नौकया। नाव से।
१३ आरोहत हस्तिनं गच्छेम। चढ़ो हाथी पर, चलें जायें।
१४ अहं तु रथेनागच्छामि। मैं तो रथ से आऊंगा।
१५ अहमश्वोपरि स्थित्वा गच्छेयं शिविकायां वा। मैं घोड़े पर सवार होके जाऊं अथवा पालकी पर।
१६ पश्य! शारदं नभः कथं निर्मलं वर्त्तते। देखो! शरद् ऋतु का आकाश कैसा निर्मल है।
१७ चन्द्र उदितो न वा? चन्द्रमा उगा वा नहीं?
१८ इदानीन्तु नोदितः खलु। इस समय तो नहीं उगा है।
१९ कीदृश्यस्तारकाः प्रकाशन्ते। किस प्रकार तारे प्रकाशमान हो रहे हैं।
२० सूर्योदयाच्चलन्नागच्छामि। सूर्योदय से चला हुआ आता हूँ।
२१ क्वापि भोजन कृतं न वा? कहीं भोजन किया वा नहीं?
२२ कृतम्मध्याह्नात् प्राक्। किया था मध्याह्न से पूर्व।
२३ अधुनाऽत्र कर्त्तव्यम्। अब यहां कीजिये।
२४ करिष्यामि। करूंगा।