In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : २८. विवाहस्त्रीपुरुषालापप्रकरणम्
१ त्वया कीदृशो विवाहः कृतः? तूने किस प्रकार का विवाह किया था?
२ स्वयंवरः। स्वयंवर।
३ स्त्र्यनुकूलाऽस्ति न वा? स्त्री अनुकूल है वा नहीं?
४ सर्वथाऽनुकूला। सब प्रकार से अनुकूल है।
५ कत्यपत्यानि जातानि सन्ति? कितने लड़के हुए हैं?
६ चत्वारः पुत्रा द्वे कन्यके च। चार पुत्र और दो कन्या।
७ भो स्वामिन्! नमस्ते। स्वामीजी! नमस्ते अर्थात् मैं आपका सत्कार करती हूं।
८ नमस्ते प्रिये! नमस्ते प्रिया!
९ काञ्चित्सेवामनुज्ञापय। कुछ सेवा की आज्ञा करिये।
१० सर्वथैव सेवयसि पुनराज्ञापनस्य काऽऽवश्यकतास्ति। सब प्रकार की सेवा करती ही हो फिर आज्ञा करने की क्या आवश्यकता है।
११ अधुना भवाञ्च्छ्रमं कृतवानत उष्णेन जलेन स्नातव्यम्। आज आपने श्रम किया है, इस लिये गरम जल से स्नान करना चाहिये।
१२ गृहाणेदं जलमासनं च। लीजिये यह जल और आसन।
१३ इदानीं भ्रमणाय गन्तव्यम्। इस घड़ी घूमने के लिये जाना चाहिये।
१४ क्व गच्छेव? कहा जायें?
१५ उद्यानेषु। बगीचों में।