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स्त्रीश्वश्रूश्वशुरादिसेव्यसेवकप्रकरणम्

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : २९. स्त्रीश्वश्रूश्वशुरादिसेव्यसेवकप्रकरणम्

१ हे श्वश्रु! सेवामाज्ञापय किं कुर्याम्? हे सास! सेवा की आज्ञा कीजिये क्या करूं?

२ सुभगे! जलं देहि। सुभगे! जल दे।

३ गृहाणेदमस्ति। लीजिये यह है।

४ हे श्वशुर! भवान् किमिच्छत्याज्ञापयतु। हे श्वसुर! आपकी क्या इच्छा है, आज्ञा दीजिये।

५ हे वशंवदे! त्वत्सेवयाऽहमतीव तुष्टोऽस्मि। हे वंशवदे तेरी सेवा से मैं बहुत प्रसन्न हूं।