In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : ३१ सायंकालकृत्यप्रकरणम्
१ इदानीन्तु सन्ध्यासमय आगतः सायं-सन्ध्यामुपास्य भोजनं कृत्वा भ्रमणं कुरुत। अब तो सन्ध्या समय आया, सन्ध्योपासन और भोजन करके घूमना-घामना करो।
२ अद्य त्वया कियत् कार्यं कृतम्? आज तूने कितना काम किया?
३ एतावत्कृतमेतावदवशिष्टमस्ति। इतना किया और इतना बाकी है।
४ अद्य कियान् लाभो व्ययश्च जातः? आज कितना लाभ और खर्च हुआ है?
५ पञ्चशतानि मुद्रा लाभः, सार्द्धद्वे शते व्ययश्च। पांच सौ रुपये लाभ और ढाई सौ खर्च हुए।
६ इदानीं सामगानं क्रियताम्। इस समय सामवेद का गान कीजिये।
७ वीणादीनि वादित्राण्यानीयताम्। वीणादिक बाजे लाइये।
८ आनीतानि। लाये।
९ वाद्यताम्। बजाइये।
१० गीयताम्। गाइये।
११ कस्य रागस्य समयो वर्त्तते? किस राग का काल है?
१२ षड्जस्य। षड्ज का।
१३ इदानीं दशघटिकाप्रमिता रात्रिर्गता इस समय दश घड़ी रात बीती, सोइये।
शयीरन्।
१४ गम्यतां स्वस्वस्थानम्। जाओ अपने अपने जगह को।
१५ स्वस्वशय्यायां शयनं कर्त्तव्यम्। अपने अपने बिछौने पर सोइये।
१६ सत्यमेवमेतदीश्वरकृपया सुखेन रात्रिर्गच्छेत् प्रभातमागच्छेत्। सत्य है, ऐसे ही ईश्वर की कृपा से सुख से रात बीते और सवेरा हो।