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महर्षि दयानन्द व्याख्या : ३४. ग्राम्यपशुप्रकरणम्
१ भो गोपाल! गा वने चारय। हे अहीर! गौओं को वन में चरा।
२ तत्र या धेनवस्ताभ्योऽर्द्धं दुग्धं त्वया दुग्ध्वा स्वामिभ्यो देयमर्द्धं च वत्सेभ्यः पाययितव्यम्। वहाँ जो गौएं हैं उनसे आधा दूध दुहकर तू मालिक को ग्रहण करा अर्थात् दो और आधा बछड़ों को पिला।
३ एतौ वृषभौ रथे योजयितुं योग्यौ स्तः, इमौ हले खलु। ये दोनों बैल गाड़ी में वा रथ में जोतने के योग्य हैं, और ये दोनों हल ही में।
४ पश्येमाः स्थूला महिष्यो वने चरन्ति। देख! ये मोटी भैंसें वन में चरती हैं।
५ आगच्छ भो! द्रष्टव्यम्महिषाणां युद्धं परस्परं कीदृशं भवति। आओ जी! देखने योग्य भैसों का युद्ध किस प्रकार परस्पर आपस में हो रहा है।
६ अस्य राज्ञो बहव उत्तमा अश्वाः सन्ति। इस राजा के यहाँ बहुत से उत्तम घोड़ेहैं।
७ किमियं राज्ञः सतुरङ्गा सेना गच्छति? क्या यह राजा की घोड़ों सहित सेना जाती है?
८ श्रोतव्यं! हरयः कीदृशं ह्रेषन्ते। सुनिये! घोड़े किस प्रकार हिनहिनाते हैं
९ यथा हस्तिनः स्थूलाः सन्ति तथा हस्तिन्योऽपि। जैसे हाथी मोटे हैं वैसी हथिनी भी हैं।
१० नागाः समं गच्छन्ति। हाथी बराबर चाल से चलते हैं।
११ शृणु! करिणः कीदृशं शब्दयन्ति। सुन! हाथी कैसा शब्द करते हैं।
१२ पश्येमे गजोपरि स्थित्वा गच्छन्ति। देख! ये हाथी पर बैठ कर जाते हैं।
१३ अस्य राज्ञः कतीभास्सन्ति? इस राजा के यहाँ कितने हाथी हैं?
१४ पञ्च सहस्राणि। पांच हजार।
१५ रात्रौ श्वानः प्रबुक्कन्ति। रात में कुत्ते भौंकते हैं।
१६ प्रातः कुक्कुटाः सम्प्रवदन्ति।*१
[*१. यह वाक्य ग्राम्यस्थपक्षिप्रकरण में होना चाहिये। सम्पादक] सवेरे मुरगे बोलते हैं।
१७ मार्जारो मूषकानत्ति। बिल्ला मूसों को खाता है।
१८ कुलालस्य गर्द्दभा अतिस्थूलाः सन्ति। कुम्भार के गदहे अत्यन्त मोटे हैं।
१९ शृणु! लम्बकर्णा रेकन्ते। सुन! लम्बे कानों वाले गदहे रेंकते हैं।
२० ग्राम्यशूकराः पुरीषं भक्षित्वा भूमिं शुन्धन्ति। गाँव के सुअर मैला खाके भूमि को शुद्ध करते हैं।
२१ उष्ट्रा भारं वहन्ति। ऊंट बोझा ढोते हैं।
२२ अजाविपालोऽजा अवीर्दोग्धि। गड़रिया बकरी और भेड़ी को दुहता है।
२३ पशवोऽपुर्नद्यां जलम्। पशुओं ने नदी में जल पिया।
२४ रक्तमुखो वानरोऽतिदुष्टो भवति कृष्णस्तु श्रेष्ठः खलु। लाल मुख का बन्दर बड़ा दुष्ट और काले मुंह का लंगूर अच्छा होता है।
२५ वानरी मृतमपि बालकं न त्यजति। बन्दरी मरे हुए भी बच्चे को नहीं छोड़ती।
२६ गोपालेन गावो दुग्धा न वा? ग्वाले ने गौ दुही वा नहीं?
२७ कपिलाया गोर्मधुरं पयो भवति। कपिला गौ का दूध मीठा होता है।
२८ अयं वृषभः कियता मूल्येन क्रीतः? यह बैल कितने मोल से खरीदा है?
२९ शतेन रूप्यैः। सौ रुपयों से।
३० कतिभिः कार्षापणैः प्रस्थं पयो मिलति। कितने पैसों से सेर दूध मिलता है?
३१ द्वाभ्यां पणाभ्याम्। दो पैसों से।
३२ पश्य देवदत्त! वानराः कथं प्लवन्ते। देख देवदत्त! बन्दर कैसे कूदते हैं।
३३ अयं महाहनुत्वाद्धनुमान्वर्त्तते। यह बन्दर बड़ी (ठोड़ी) वाला होने से हनुमान् है।