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जलजन्तुप्रकरणम्

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : ३९. जलजन्तुप्रकरणम्

१ तिमिङ्गिला मत्स्याः समुद्रे भवन्ति। तिमिङ्गिल मछलियाँ समुद्र में होती हैं।

२ रोहूखङ्गसिंहतुण्डराजीवलोचनाश्च कुण्डपुष्करिणीनदीतडागसमुद्रेषु निवसन्ति। रोहू, खड्ग, सह, तुंड और राजीवलोचन इन नामों की मछलियाँ, कुण्ड, बावली, नदी, तलाब और समुद्र में वास करती हैं।

३ ग्राहः पशूनपि गृहीत्वा निगलति। मगर पशुओं को भी पकड़ कर लील जाता है।

४ नक्रा अपि महान्तो भवन्ति। घरियार (नाके) भी बड़े होते हैं।

५ कूर्माः स्वाङ्गानि सङ्कोच्य प्रसारयन्ति। कछुए अपने शरीर के अङ्गों को समेट कर फैलाते हैं।

६ वर्षासु मण्डूकाः शब्दयन्ति। वर्षा काल में मेंढक शब्द करते हैं।

७ जलमनुष्या अप्सु निमज्य तट आसते। जल के मनुष्य पानी में डूबकर तीर पर बैठते हैं।