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Choose Sutra

अयस्कारप्रकरणम्

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : ४५. अयस्कारप्रकरणम्

१ भो अयस्कार! त्वयाऽस्मादयसः बाणा-सिशक्तितोमरमुग्दरशतघ्नीभुशण्ड्यो निर्मातव्याः। हे लोहार! तू इस लोहे के बाण, तलवार बरछी, तोमर, मुग्दर, बंदूक और तोप बना दे।

२ एतस्मात् क्षुरादीनि च। इससे छुरे आदि।

३ इमौ कलशकटाहौ त्वया विक्रीयेते यह घड़ा और कड़ाही को तू बेचता है वा न वा? नहीं?

४ विक्रीणामि। बेचता हूँ।

५ एतान् कीलकण्टकान् किमर्थान् रचयसि? इन कील-कांटों को किसलिये बनाता है?

६ विक्रयणाय। बेचने के लिये।