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महर्षि दयानन्द व्याख्या : ५१. लेख्यलेखकप्रकरणम्
१ मनुष्यो लेखाभ्यासं सम्यक् कुर्यात्। मनुष्य लिखने का अभ्यास अच्छे प्रकार करे।
२ अयमनुत्तममक्षरविन्यासं करोति। यह अत्युत्तम अक्षर लिखता है।
३ लेखनीं सम्पादय। कलम बना।
४ मसीपात्रमानय। दवात ला।
५ पुस्तकं लिख। पोथी लिख।
६ तत्र पत्रं लिखित्वा प्रेषितं न वा? वहां चिट्ठी लिखकर भेजी वा नहीं?
७ प्रेषितं पञ्च दिनानि व्यतीतानि तस्य प्रत्युत्तरमप्यागतम्। भेजी, पांच दिन बीते, उसका जवाब भी आ गया।
८ सुवर्णाक्षराणि लिखितुं जानासि न वा? सुनहरी अक्षर लिखने जानता है वा नहीं?
९ जानामि तु परन्तु सामग्रीसम्पादने लेखे च विलम्बो भवति। जानता तो हूँ परन्तु चीज इकट्ठी करने और लिखने में देर होती है।
१० यद्यंगुष्ठतर्जनीभ्यां लेखनीं गृहीत्वा मध्यमोपरि संस्थाप्य लिखेत्तर्हि प्रशस्तो लेखो जायेत। जो अंगूठा तर्जनी अंगुली से कलम को पकड़कर बीचली अंगुली पर रख कर लिखे तो बहुत अच्छा लेख होवे।
११ अयमतीव शीघ्रं लिखति। यह अत्यन्त जलदी लिखता है।
१२ एतस्य लेखनी मन्दा चलति। इसकी कलम धीरे चलती है।
१३ यदि त्वमेकाहं सततं लिखेस्तर्हि कियतः श्लोकांल्लिखितुं शक्नुयाः? यदि तू एक दिन निरन्तर लिखे तो कितने श्लोक लिख सके?
१४ पञ्चशतानि। पांच सौ।
१५ यदि शिक्षां गृहीत्वा शनैः शनैर्लिखितुमभ्यस्येत्तर्ह्यक्षराणां सुन्दरं स्वरूपं च जायते। यदि शिक्षा ग्रहण कर के धीरे-धीरे लिखने का अभ्यास करे तो अक्षरों का दिव्यस्वरूप स्पष्टता और स्पष्टता होवे।
१६ अस्मिंल्लाक्षारसे कज्जलं सम्मिलितं न वा? इस लाख के रस में कज्जल मिला है वा नहीं?
१७ मिलितं तु न्यूनं खलु वर्त्तते। मिला तो है परन्तु थोड़ा है।
१८ मनुष्यैर्यादृशः पठनाभ्यासः क्रियेत तादृश एव लेखनाभ्यासोऽपि कर्त्तव्यः। मनुष्य लोग जैसा पढ़ने का अभ्यास करें वैसा ही लिखने का भी अभ्यास करना चाहिये।
१९ मया वेदपुस्तकं लेखयितव्यमस्त्येकेन रूप्येण कियतः श्लोकान् दास्यसि? मुझे वेद का पुस्तक लिखाना है, एक रुपैया से कितने श्लोक देगा?
२० अत्युत्तमानि ग्रहीष्यसि चेत्तर्हि शतत्रयं मध्यमानि चेच्छतपञ्चकम्, साधारणानि चेत्सहस्रं श्लोकान् दास्यामि। जो बहुत अच्छे लोगे तो तीन सौ और मध्यम लोगे तो पांच सौ। यदि बहुत साधारण वा घटिया लोगे तो हजार श्लोक दूंगा।
२१ शतत्रयमेव ग्रहीष्यामि परन्त्वत्युत्तमं लिखित्वा दास्यसि चेत्। तीन सौ ही लूंगा परन्तु बहुत अच्छा लिख कर देगा तो।
२२ वरमेवमेव करिष्यामि। अच्छा, ऐसा ही करूंगा।