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Choose Sutra

पुरुषार्थ के भेद

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो अप्राप्त वस्तु की इच्छा करनी, प्राप्त को अच्छी प्रकार रक्षण करना, रक्षित को बढ़ाना और बढ़े हुए पदार्थों का सत्य विद्या की उन्नति में तथा सबके हित में खर्च करना है, इन चार प्रकार के कर्मों को पुरुषार्थ कहते हैं।